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वो बहुत याद आए भुलाने के बाद8 comments

Rohit Jain wrote 2 months ago: वो बहुत याद आए भुलाने के बाद आग बुझती नहीं है ज़माने के बाद और इस से बड़ी कोई मुश्किल नहीं ज़िंदगी ब … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Sep, 2009, 2009, आए, कविता, गज़ल, जैन, बहुत

उस इम्तिहान के पल में हम क्या कहें के झिझक गए4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरे अश्क़ेनामुराद यूं, निगाह से थे छलक गए चरागेदिल को बुझा गए, ये आज ऐसे चमक गए हमें प्यास थी दीदार … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Mar 2008, पल, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता

दुख के चेहरे पर लकीरें याद की5 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: दुख के चेहरे पर लकीरें याद की सुन रहा हूं सदा दिलेबरबाद की तेरी महफ़िल तेरा परचम ओ’ हुजूम अब कि … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

निगाहों के आसपास

Rohit Jain wrote 1 year ago: कुछ ख्वाब सजा रखे हैं निगाहों के आसपास कुछ गुल खिला रखे हैं निगाहों के आसपास तू मुत्तसिल हो तो ही तो … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, एक, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

दिल के तलबखाने में आज कैसी शकेबाई सी है

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल के तलबखाने में आज कैसी शकेबाई सी है कोई साज़ नहीं है कानों में शहनाई सी है हाय तमाशा क्या लगा है … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

आज भी थोड़ा सा पढ़ के छोड़ दिया है

Rohit Jain wrote 1 year ago: आज भी थोड़ा सा पढ़ के छोड़ दिया है ज़िंदगी का एक और सफ़हा मोड़ दिया है आज फिर सोचा के चुन लूँ ख़ार कुछ नये … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Aug 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

ज़िन्दगी के मोड़ पर आके है ठहरी तिशनगी

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िन्दगी के मोड़ पर आके है ठहरी तिशनगी साँस टुकड़ा अश्क़ धज्जी और गहरी तिशनगी तन्हाइयां भी साथ हैं साथ ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Jun 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

हाथ कुछ आया नहीं बेरुखी के सिवा

Rohit Jain wrote 1 year ago: हाथ कुछ आया नहीं बेरुखी के सिवा वो और कुछ नहीं था एक अजनबी के सिवा ना जफ़ाएं ना तक़ाज़े ना बेरुखी ना दग … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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