क्या बताऍ के जॉ गई कैसे फिर से दोहराऍ वो घड़ी कैसे क्या बताऍ के जॉ गई कैसे किसने रास्ते मे चॉद रखा था मुझको ठोकर लगी कैसे क्या बताऍ के जॉ गई कैसे वक़्त पे पॉव कब रखा हमने ज़िदगी मुह के बल गिरी कैसे क्या … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: क्या बताऍ के जॉ गई कैसे फिर से दोहराऍ वो घड़ी कैसे क्या बताऍ के जॉ गई कैसे किसने रास्ते मे चॉद रखा था … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: तेरी सूरत जो भरी रहती है आँखों में सदा अजनबी चेहरे भी पहचाने से लगते हैं मुझे तेरे रिश्तों में तो दु … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: है लौ ज़िंदगी ज़िंदगी नूर है मगर इस पे जलने का दस्तूर है लौ ज़िंदगी कभी सामने आता मिलने उसे बड़ा नाम् उस … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: सहमा सहमा डरा सा रहता है जाने क्यूँ जी भरा सा रहता है सहमा सहमा डरा सा रहता है इश्क में और कुछ नहीं … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: फुलों की तरह लब खोल कभी ख़ूश्बू की ज़ुबा मे बोल कभी अलफ़ाज़ परखता रेहता है आवाज़ हमारी तोल कभी अन्मोल नही … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: ज़िंदगी क्या है जानने के लिये ज़िंदा रहना बहुत जरुरी है आज तक कोई भी रहा तो नही सारी वादी उदास बैठी है … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: आप अगर इन दिनो यहाँ होते हम ज़मीन पर भला कहाँ होते आप अगर इन दिनो यहाँ होते वक़्त गुज़्रा नही अभी वरना … more →
Amarjeet Singh wrote 3 years ago: नज़र उठाओ ज़रा तुम तो क़ायनात चले, है इन्तज़ार कि आँखों से “कोई बात चले” || तुम्हारी मर्ज़ी ब … more →