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Blogs about: कोई

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कोई सूरज हमारी ताक में है5 comments

Rohit Jain wrote 10 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, रोहित, जैन, Rohit, jain, 2008

और नहीं1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: मरने की दुआ दे दो हमको जीने का तमाशा और नहीं इस रंज मुसीबत ग़म से भरी दुनिया की तमन्ना और नहीं साहिल … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, apr 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

कोई मुग़ालता तो नहीं4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: देख आऊं वो गिरा खून कहीं मेरा तो नहीं मेरी ही लाश सजी हो कहीं ऐसा तो नहीं टूट ही जाते हैं ख़्वाब, साँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, apr 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं

Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई

Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई बोलो इस से बड़ा किसी का सफ़र है कोई जिस सिम्त भी देखूँ नज़र आता है क … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Aug 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

खुशबू कोई भटकती हुई साँसों में चली आती है

Rohit Jain wrote 1 year ago: खुशबू कोई भटकती हुई साँसों में चली आती है काँच के ख्वाब लाती हैं, हिज्र की बिजली लाती है जब भी सुनता … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Mar 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये

Rohit Jain wrote 1 year ago: ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये और कुछ नहीं कोई इन्तेज़ार मिल जाये ज़िंदगी साहिलों पर अटकी हुई है अब … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Feb 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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