मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवाने से के अब उसे तो जल के ख़ाक ही हो जाना है जो तूने कह दिया तो तर्क़ेमोहब्ब्त कर ली जज़ा में अब भले ही ह… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 4 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →
oskanpur wrote 1 year ago: श्री लालू प्रसाद यादव भारतीय रेल मंत्री को हिन्दी में ईमेल कैसे करें - LokVidya IT KaryaShala Evam M … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ड़ूबनेवाले को इक ही तिनके का सहारा काफ़ी है समझदार को कहते हैं बस एक इशारा काफ़ी है यूँ ही नहीं कहता हू … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है ये कैसी हलचल मची है महफ़िल में क् … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए ये देखो खून में अपने ही हम नहाये हुए न जाने मुझको हुआ कौन सा मक़ाम हास … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल को उनके आने की उम्मीद सी है कुछ करम हो जाने की उम्मीद सी है हाथ में जाम लिये बैठा हूँ आँखों से म … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ग़म-ए-हस्ती को कोई अज़गार मिल जाये और कुछ नहीं कोई इन्तेज़ार मिल जाये ज़िंदगी साहिलों पर अटकी हुई है अब … more →