Alok Pandey wrote 12 months ago: हार जाते हर जनम हम खेल में ओ छली तेरा शकुनिया दांव है चलते चलते थक गया हर पांव है और कितनी दूर तेरा … more →
Alok Pandey wrote 12 months ago: नाक का मोती अधर की कांति से बीज दाड़िम का समझकर भ्रांति से देख शुक सोच रहा है, होकर मौन है अरे यह दू … more →
Alok Pandey wrote 12 months ago: गलती है हिमशिला सी, सत्य है, गठन देह की खोकर हो जाती कितनी असीम, पयस्विनी होकर (उर्वश … more →
Alok Pandey wrote 12 months ago: कहा तो था फ्रायड ने बोलकर देखो सच अपने प्रिय से फिर वह न रहेगा प्रिय … more →
Alok Pandey wrote 1 year ago: लायी हयात आये कजा ली चली चले। न अपनी खुशी हम आये, न अपनी खुशी चले।। … more →
Alok Pandey wrote 1 year ago: युग युग से सूखे अधरों पर मुरझाये रुखे चेहरों पर आंसू से भींगी पलकों पर उलझी बिख … more →
Alok Pandey wrote 1 year ago: जो कामना नर को सुरपुर खींच ले जाती है। वही खींच लाती है धरती पर अम्बर वालों को ।। … more →
Alok Pandey wrote 1 year ago: दिखाउंगा तमाशा दी अगर फुरसत जमाने ने मेरा हर एक दाग-ए-दिल है, तुख्म-ए-सर्व-चरागां का … more →
Alok Pandey wrote 1 year ago: ललित लवंग लता परिशीलन कोमल मलय समीरे। मधुकर निकर करमबित कोकिल कूजत कुंज कुटीरे।। … more →