ये ज़ख़्म-ए-जुदाई मेरा भर क्यों नहीं जाता वो शख़्स मेरे दिल से उतर क्यों नहीं जाता कब तक रहूं हैरान परेशान हर घड़ी वो शख़्स कोई फ़ैसला कर क्यों नहीं जाता क्यों मेरे ही पहलू में ये आता है लौटकर ये ग़म ज़रा पूछ… more →
इक शायर अंजाना सा...kmuskan wrote 1 year ago: क्यों ? जिंदगी बार- बार उसी मोड़ पे ले आती है जहाँ से हम चले थे क्यों ? जिंदगी बार- बार उन्ही सवालो … more →
विनय wrote 1 year ago: क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता क्यों? मुझे बेक़रारियों से क़रार नहीं मिलता क्यों? ढल रहा हूँ दि … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ये ज़ख़्म-ए-जुदाई मेरा भर क्यों नहीं जाता वो शख़्स मेरे दिल से उतर क्यों नहीं जाता कब तक रहूं हैरान परे … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आज तक समझा नहीं मै क्यों गया तू छोड़कर क्या कमी थी प्यार में रिश्ते गया सब तोड़कर देख तू आ के ज़रा मेरी … more →