‘नज़र’ वह हस्ती’ उदू उसका’ उसका नाम रटे जो लिख दे वह नाम दिल पर कभी न मिटे जीता है भला कौन अदू उसका उससे लड़कर वह आँधी है जिससे बरगद का दरख़्त फटे… शायिर: विनय प्रजापति ‘न… more →
तख़लीक़-ए-नज़रNishant wrote 4 months ago: एक १२-१३ साल के लड़के को बहुत क्रोध आता था। उसके पिता ने उसे ढेर सारी कीलें दीं और कहा कि जब भी उसे क … more →
Nishant wrote 6 months ago: एक ज़ेन शिष्य ने अपने गुरु से पूछा – “मैं बहुत जल्दी क्रोधित हो जाता हूँ। कृपया मुझे इससे … more →
विनय wrote 1 year ago: ‘नज़र’ वह हस्ती’ उदू उसका’ उसका नाम रटे जो लिख दे वह नाम दिल पर कभी न मिटे जी … more →
विनय wrote 1 year ago: जब जीना लाज़मी हो जाये तो सबको सभी को मिटाके जियो क़द कभी छोटा न हो ‘नज़र’ सबको घुटनों पर झ … more →
विनय wrote 1 year ago: मैंने आँखों को लहू का समन्दर और दिल को दस्तो-सहरा बनाया ‘नज़र’ को अय्यार पेश सैय्याद बता … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं वो आग हूँ जो लग जाऊँ तो जंगल का तिनका-तिनका जला दूँ फैल जाऊँ चंद लम्हों में कुछ इस तरह जैसे आग क … more →