क्षणिकाएँ १- ज़िन्दगी की मंज़िलों के रास्ते हैं अनगिनत, शर्त है कि रास्ते, खुद ही तलाशने पड़ते हैं। २- एक ही सूरज यहाँ भी, एक ही सूरज वहाँ भी, पर, एक साथ हर जगह, सुबह नहीं होती। ३- अधिकार मांगते… more →
अनुभूति कलशramadwivedi wrote 2 months ago: क्षणिकाएँ १- ज़िन्दगी की मंज़िलों के रास्ते हैं अनगिनत, शर्त है कि रास्ते, खुद ही तलाशने पड़ते हैं … more →
ramadwivedi wrote 11 months ago: १- अपने घर की गली में खेलते हुए हमारा बचपन सुरक्षित तो था, लेकिन आज वह गली भी अपरिचित,दहशतभरी सी लगत … more →
pryas wrote 2 years ago: सभी क्षणिकाएँ, के.पी. सक्सेना ’दूसरे’ द्वारा रचित। - जानवर - (१) जानवर की कोख से जनते न देखा आदमी आद … more →