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Blogs about: क्षणिका

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वादा और इंतजार-व्यंग्य कविता (vada aur intzar-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: गिला शिकवा खूब किया दिन भर पूरे जमाने का फिर भी दिल साफ हुआ नहीं। इतने अल्फाज मुफ्त में खर्च किये फि … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, bharat

हमदर्दी कला-व्यंग्य कविता (art of sypothy)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, हिन्दी

ख्वाहिशें हमेशा बनी रही यार-हिंदी कविता (khavahishen-hindi kavita1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: यूं तो दर-ब-दर भटकते रहे इस नीले आसमान के नीचे। कभी सोचा न था कि इस दौर में भी छप रहे हैं धरती पर हम … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, हिन्दी, कला, मनोरंजन, मस्ती

अय्याशी की चीजों पर वह फ़िदा हो जाते-हिंदी व्यंग्य कविताएँ (khamosh duniya-hindi kavita

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: निरापद रहने की कोशिश निष्क्रिय बना देती है बाहर जलती आग पर दिल को ठंडा रखने की सोच घर को राख बना देत … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, महत्वपूर्ण ब्लॉग, समाज, हिंदी साहित्य

ऐसे ही अफसाने-हिंदी व्यंग्य कविता (bade log-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब बहता था दरिया में पानी तब भला कौन वादा करता था उसे लाने का। कहीं बांध बनाये कहीं रास्ता बदला पानी … more →

Tags: कविता, inglish, व्यंग्य, भारत, India, bharat, Shayri, Blogger, Blogging

ख्वाब जब हकीकत बनते हैं-हिन्दी शायरी (khavab aur haqiqut-hindi shayri)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सपने जैसे शहर में ख्वाब लगती उस इमारत की छत के नीचे रौशनी की चमक से आंखें चुंधिया गयी हैं फिर याद आत … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य कविता, समाज

नये जमाने में-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: एक दोस्त ने फोन पर दूसरे दोस्त से ‘क्या स्कोर चल रहा है दूसरा बिना समझे तत्काल बोला ‘यार, ऐसा लगता ह … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, मस्तराम, समाज, हंसना

अपनों से अजनबी हो जाओ-हिंदी शायरी (hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हमने छोड़ दिया यकीन करना धोखे की बचने को यही रास्ता मिला उधार तो अब भी देते हैं वापसी पर नहीं होता कि … more →

Tags: दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, कला, मनोरंजन

समाज हिलता नजर आता हास्य व्यंग्य कविता (javani divani aur budhapa-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब वह जवान थे तब तक लिये खूब लिये उन्होंने मजे अब बुढ़ापे में नैतिक चक्षु जगे। किताबों में छिपाकर खूब … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, शेर

भीड़ में गुलाम-व्यंग्य कविता (soch ke gulam-vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम यूं तन्हा नही रह जाते अगर उस भीड़ में शामिल होते। सभी चले जा रहे थे उम्मीदों के गीत गा रहे थे हमने … more →

Tags: अनुगूंज, अभिव्यक्ति, आदमी, कविता, कशिश, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य

यह नोट पहले क्यों नहीं दिखाया-हास्य व्यंग्य कविता (paisa aur iman-hasya vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आम आदमी उस कार्यालय पहुंचा तो सभी के कानों में मोबाइल का तार लगा पाया। सुन रहे थे सभी गाने उसके समझ … more →

Tags: हिन्दी, हिंदी साहित्य, शायरी, शेर, Hindi Poem, मस्तराम, mastram, Sher, समाज

बासी खबर में उबाल-हिंदी व्यंग्य कविता (basi khabar men ubal-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अखबार में छपी हर खबर पुरानी नहीं हो जाती है। कहीं धर्म तो कहीं भाषा और जाति के झगड़ों में फंसे इंसानी … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging

इश्क,मोबाइल और मंदी -हास्य व्यंग्य कविता (ishq mobil and economy-hindi comedy satire poem

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आशिक ने माशुका को समझाया ‘‘मोबाईल पर इतनी बात मत करो मैं नहीं उठा सकता खर्चा हर हफ्ते कपड़े भी न मांग … more →

Tags: अभिव्यक्ति, शायरी, भारत, bharat, yakeen, शेर, अनुभूति, हिंदी साहित्य, Friends

हिंदी दिवस इसलिये मनाते-हास्य कविता (hindi divas manate-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: पोते ने कहा दादा से ‘पापा ने उस कार्यक्रम में साथ ले जाने से मना कर दिया जिसमें हर वर्ष हिंदी दिवस प … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, समाज, हास्य व्यंग्य, हिंदी साहित्य

रिश्ता और सवाल जवाब-हास्य कविता (rishta aur sawal jawab-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: रिश्ता तय करने पहुंचे लड़के ने लड़की से पूछा ‘‘क्या तुम्हें खाना पकाना सिलाई कढ़ाई, बुनाई तथा घर गृहस्थ … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, लघुकथा, व्यंग्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu

कल्पना से परे-हिंदी व्यंग्य कविता (kalpna se pare-hindi vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात में सड़क पर चलते हुए जब पानी से भरे छोटे छोटे समंदर और कीचड़ के पहाड़ों से गिरता टकराता हूं। तब य … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, India, अनुभूति, चिन्तन, Blogger, Blogging, शब्द

सच का सामना और हास्य कवि-हास्य व्यंग्य कविता (face for trutu and hindi poet-hasya kavita1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उन सज्जन ने सच की पहचान करने वाली मशीन की दुकान लगाई पर उसके उद्घाटन के लिये कोई तैयार नहीं हुआ भाई। … more →

Tags: writing, हिन्दी, vyangya, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, yakeen, India, अनुभूति

अकेला अक्षर-हिंदी कविता (akshara,shabda & bhasha-hindi kavita)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कभी शब्द नहीं बनता अकेला शब्द कभी भाषा नहीं बनता। कई मिलकर बनाते हैं एक भाव समूह जिससे उनका निज परिच … more →

Tags: नज़रिया, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, bharat, अनुभूति, Blogger, Blogging, शब्द, दीपकबापू

समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज क … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका


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