Blogs about: क्षणिका

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समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

अपनी कविताओं से दूसरों के ईमेल कूड़ेदान की तरह नहीं सजाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: दनदनाता आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, आज मिल गया तुम्हारे हिट होने का मंतर अपने फ्लाप होने का दर्द … more →

Tags: inglish, कविता, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, Urdu, Education, online jurnalism, Family

इस तरह लगने लगा वहां भी मेला-हास्य कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उदास बैठा था चेला तो गुरू ने उसका कारण पूछा तो वह बोला ‘गुरूजी सभी आश्रम पर भक्तों का लगता है मेला … more →

Tags: Blogroll, hindi, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य कविता, media, Internet

मेहरबानी कर तोहफे में जल्दी दो जुदाई-हास्य हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →

Tags: vews, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Internet

जब टूटता है सन्नाटा-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: जब जज्बातों में आता ठहराव तब शब्द खामोश हो जाते स्तब्ध मन सन्नाटे में ताकता है उस समय न सोचना अच् … more →

Tags: inglish, कविता, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, साहित्य, हिंदी साहित्य, media, film

काला और सफेद बाजार-हास्य कविता4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अर्थशास्त्र के ‘मांग और आपूर्ति का नियम’ उन्होंने कुछ इस तरह समझाया ‘जब कारखाने में चीज बनती हो पर ब … more →

Tags: inglish, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, India, bharat, चिन्तन, हिंदी साहित्य, साहित्य, Shayri

बनते बिगड़ते हैं रंग और इंसान -कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पल रंग बदलती दुनियां में रिश्ते भी बदलते हैं रंंग जो सारी उमर साथ चलने का एलान करते सरेआम वह कभी नही … more →

Tags: vyangya, vividha, inglish, संपादकीय, कविता, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India

निकल पड़ें अनजाने सफर पर-कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब भी हम ढूढ़ते हैं अपने लिए प्यार पर मिलती है सब जगह से दुत्कार खुद करो चाहे किसी से भी तुम मांगो … more →

Tags: अभिव्यक्ति, व्यंग्य कविता, मातृभाषा, दीपक भारतदीप, कला, मस्तराम

वह औरत-कविता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दिन भर ईंट, पत्थर और सीमेंट का मसाला-तस्सल सिर पर रखकर ढोती वह औरत रात्रि में प्लास्टिक की छत से ढंक … more →

Tags: writing, vyangya, inglish, कविता, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, yakeen, India, bhaarat

अपने जिस्म पर इतराते हैं लोग-कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने जिस्म पर इतराते हैं लोग जिसमें रहते हैं बहुत सारे रोग जीवन की नाव वक्त की लहरों में बहती जाती … more →

Tags: Kavita, कविता, inglish, अभिव्यक्ति, संपादकीय, व्यंग्य, India, bharat, vishvaas

प्यार और नफरत, दोनों पर यकीन नहीं-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक फोरम पर घूमते घामते अपने मित्र समीरलाल ‘उड़न तश्तरी” के ब्लाग पर पहुंच गया। उनका ब्लाग … more →

Tags: vews, inglish, sher-o-shayree, संपादकीय, अभिव्यक्ति, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता

फिर कभी मोबाइल नहीं होगा खराब-हास्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सारा दिन कान से मोबाइल चिपका कर प्रेम की बातें करने वाले प्रेमी के कान हो गये  खराब कभी आवाज आती तो … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द

कम दर्शकों द्वारा फिल्म देखने की शिकायत बेमानी-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मैने एक अंग्रेजी ब्लाग पर पाकिस्तानी फिल्म ‘खुदा के लिये’ के बारे में चर्चा पढ़ी। अंग्रेजी से हिं … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, मस्तराम, विश्वास, संपादकीय, समाज

उसके जैसे (क्षणिका)5 comments

ramadwivedi wrote 1 year ago:   तुम उसके जैसे, बनने की कोशिश, कभी मत करना, क्यों कि तुम, वो नहीं बन सकते, लेकिन तुम बहुत कुछ, बन … more →

Tags: क्षणिकाएं, उसके जैसे

उड़ने की कोशिश (क्षणिका)4 comments

ramadwivedi wrote 1 year ago:         चिड़ियों  की ऊँची और ऊँची,          उड़ने की कोशिश भी,          आकाश को छू नहीं पातीं,      … more →

Tags: क्षणिकाएं

सर्वशक्तिमान नहीं पैसा बनाता है जोड़ी-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: कौन कहता है ऊपर वाला ही बनाकर भेजता इस दुनियां में जोड़ी पचास साल के आदमी के साथ कैसे जम सकती है बा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कविता, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, Blogging, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

बिना मेकअप के अभिनय-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फिल्म का नाम था ‘नौकरानी ने बनी रानी’ जोरदार थी कहानी। निर्देशक ने अभिनेत्री से कहा ‘आधी फिल्म में म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, bharat

कवि भी अपनी पीड़ाओं से छिपता है-व्यंग्य शायरी

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उसने कहा कवि से ‘तू क्यों कविता लिखता है सारे जमाने का दर्द समेट कर अपने शब्दों में अपनी ही पीड़ाओं … more →

Tags: writing, vyangya, inglish, व्यंग्य चिंतन, India, साहित्य, Internet, Urdu, web duniya

पत्थर का बोझ-हास्य व्यंग्य कवितायेँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रस्तर की इमारतों को दिखाकर वह उसका इतिहास बताते हैं सुनने वाले निहारते हुए स्वयं भी पत्थर हो जाते … more →

Tags: दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, साहित्य, हास्य व्यंग्य, हिंदी साहित्य


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