Blogs about: क्षणिका
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उसके जैसे (क्षणिका)
तुम उसके जैसे, बनने की कोशिश, कभी मत करना, क्यों कि तुम, वो नहीं बन सकते, लेकिन… more »
अनुभूति कलश
कम दर्शकों द्वारा फिल्म देखने की शिकायत बेमानी-आलेख
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दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: आज मैने एक अंग्रेजी ब्लाग पर पाकिस्ता … more »
उसके जैसे (क्षणिका)
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ramadwivedi wrote 6 days ago: तुम उसके जैसे, बनने की कोशिश, कभी मत क … more »
उड़ने की कोशिश (क्षणिका)
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ramadwivedi wrote 1 week ago: चिड़ियों की ऊँची और ऊँची, उ … more »
क्रिकेट मैच के लिये एक्शन सीन लिख देना-हास्य व्यंग्य
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दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: ब्लागर अपने कंप्यूटर पर बैठा था कि उसक … more »
पटकथा लिखने वाले ने कमाल किया-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: बगल में अखबार दबाकर घर आया फंदेबाज और … more »
जब तक अंतर्जाल की माया, रहेगी इस ब्लाग की काया-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: ब्लाग पर लिख गया एक कमेंट एक पाठक ‘ दीप … more »
नकली जिंदगी की खातिर-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: फिल्मों में ही होता है चक दे इंडिया सच … more »
श्रृंगार रस में आधुनिक कवितायें-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: आया एक आशिक का ईमेल लिख था उसमें ‘‘दीप … more »
मालिक नहीं तो मजदूर का रोल करेगा-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: फंदेबाज आया और बोला ‘दीपक बापू, मेरा छ … more »
करते हास्य कविता की पैनी धार
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दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: फंदेबाज आया और बोला ‘दीपक बापू, तुम क् … more »
यह नहीं बता सकते कि हिट होगा कि फ्लाप-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: फंदेबाज के घर के दौरे पर पहूंचे तो उसक … more »
हमारी पोस्ट भी जोरदार पाओगे-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: रास्ते में टकरा गया फंदेबाज और घूर-घूर … more »
सच के परे बहस बेकार-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: औरत पर अनाचार का प्रश्न उठता है कई बार … more »
जिंदगी के आसरे-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जिंदगी के सफर में कभी जाने तो कभी अनजा … more »
शब्द ही हमारे मित्र और गुरु-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कलम और दवात लेकर जब निकले थे घर से तो नह … more »
ब्लोग पर कमेन्ट को ही गुलाल और पकवान समझना-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अंतर्जाल पर अपनी प्रेमिका को लुभाने क … more »
तो यह था एक बकरे का बलिदान-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आया फंदेबाज और बोला दीपक बापू अंतर्जा … more »
खुद ही बहकते हैं लोग-हिन्दी शायरी
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अपने लिखने से मैं दुनिया बदल सकता तो ऐ … more »
कोई नहीं हमारे पास बहाना-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: इधर जाऊं तो लोगों के चीखने चिल्लाने की … more »
