आसमान फिर सिमट रहा है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) आसमान जब भी उतरता है धरा पर उसके पास होते हैं सूरज, चाँद, सितारे और एक असीमित फैलाव उन्मुक्त उड़ान के लिए धरा चाँद सितारों से दमकती अनन्त ओढ़नी क… more →
सृजन और सरोकाररवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 months ago: आसमान फिर सिमट रहा है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) आसमान जब भी उतरता है धरा पर उसके पास होते ह … more →