काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई दिल की हिम्मत से सुनो झुक जाते हैं लश्कर कई ये जो मतलबी जहान है, ये फ़ितरत-ए-इन्सान है पेड़ पर लगते ही फल धर लेते हैं पत्थर कई तू ड़रा सा क्यों खड़ा है देख तेरे आ… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: काटे हैं इन्सान ने दिल की रगों से खंजर कई दिल की हिम्मत से सुनो झुक जाते हैं लश्कर कई ये जो मतलबी जह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कहाँ बदले मेरी नज़र की ख़ता थी उस ही की दीवारें ज़रा मजबूत नहीं थ … more →