अपनी प्रिय कविताओं के उल्लेख के बाद शहीद बिस्मिल ने अपनी कालकोठरी में गाये जाने वाले गीतों का उल्लेख करते हुये एक अँतिम नोट राष्ट्रवासियों के नाम दिया है, जो कि स्वगत कथन जैसा ही है । – प्रस्तुतकर्ता … more →
काकोरी काँड : Kakori Conspiracyडा. अमर कुमार wrote 3 months ago: अपनी प्रिय कविताओं के उल्लेख के बाद शहीद बिस्मिल ने अपनी कालकोठरी में गाये जाने वाले गीतों का उल्लेख … more →
डा. अमर कुमार wrote 3 months ago: अब तक आपने पढ़ा.. “ वायसराय ने जब हम काकारी के मृत्युदण्ड वालों की दया प्रार्थना अस्वीकार की थी, उसी … more →
डा. अमर कुमार wrote 4 months ago: अब तक आपने पढ़ा.. “ यह जानते हुए कि अंगेज सरकार कुछ भी न सुनेगी, मैंने सरकार को प्रतिज्ञा पत्र ही क्य … more →
डा. अमर कुमार wrote 4 months ago: अब तक आपने पढ़ा… उनको उचित है कि अधिक से अधिक अंग्रेजी के दसवें दर्जें तक की योग्यत … more →
डा. अमर कुमार wrote 4 months ago: अब तक आपने पढ़ा… “ इसी कारण महामना देशबन्धु चितरंजन दास ने अन्तिम समय ग्राम संगठन ही अपने जीवन का ध्य … more →
डा. अमर कुमार wrote 4 months ago: अब तक आपने पढ़ा … “ मैं इस समय इस परिणाम पर पहुंचा हूं कि यदि हम लोगों ने प्राणपण से जनता को शिक्षित … more →
डा. अमर कुमार wrote 5 months ago: पिछली कड़ी में..निश्चित किया कि अब भाग चलूं । पाखाने के बहाने से बाहर निकाला गया । एक सिपाली कोतवाली … more →
डा. अमर कुमार wrote 5 months ago: अब विचारने की बात यह कि भारतवर्षमें क्रान्तिकारी आन्दोलन के समर्थक कौन से साधन मौजूद है ? गत पृष्ठो … more →
डा. अमर कुमार wrote 6 months ago: ऐतिहासिक दृष्टि से हम लोगों के कार्य का बहुत बड़ा मूल्य है । जिस प्रकार भी हो, यह तो मानना ही पड़ेगा … more →
डा. अमर कुमार wrote 6 months ago: फांसी की कोठरी अन्तिम समय निकट है । दो फांसी की सजायें सिर पर झूल रहा है । पुलिस को साधारण जीवन में … more →
डा. अमर कुमार wrote 6 months ago: नमस्कार ! एक अँतराल के पश्चात यह कड़ियाँ प्रारँभ करने का मन बनाया है । किसी हुतात्मा की अवमा … more →
डा. अमर कुमार wrote 8 months ago: मैं भी तो अल्पज्ञ जीव मात्र ही हूं : श्री बिस्मिल की इस स्वीकारोक्ति में मेरी असहमति का कोई स्थान … more →
डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: तलवार ख़ूँ में रंग लो, अरमान रह न जाये । बिस्मिल के सर पे कोई अहसान रह न जाये ।। अब आगे पृष्ठ 131 से … more →
डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: उसने अपना बयान दे दिया और वह सरकारी गवाह बना लिया गया । यह कुछ अधिक जानता था । उसके बयान से क्रान्ति … more →
डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: मैंने नमस्ते कर उत्तर दिया कि आप के चरणों की कृपा है । क्योंकि इस मुकद्में के पहले मैंने किसी अदालत … more →
डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: एक मेडिकल बोर्ड बनाया गया, जिसमें तीन डाक्टर थे । उन बुद्धू की जब कुछ समझ में न आया, तो यह कह दिया … more →
डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: बनारसीलाल के सम्बन्ध में सब मित्रों ने कहा था कि इस से अवश्य धोखा होगा, पर मेरी बुद्धि में कुछ न समा … more →
डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: मैं गिरफ़्तार हो गया । मैं केवल एक अंगोछा पहने हुये था । पुलिस वालों को अधिक भय न था । पूछा यदि घर मे … more →
डा. अमर कुमार wrote 9 months ago: नवयुवकों का भी उत्साह बढ़ गया । जितना कर्जा था निपटा दिया । अस्त्रों की खरीद के लिये लगभग एक हजार रूप … more →