खत लिखने की रस्म नयनो में ये घटा,आज फिर घिर आई है खुशियों की बरसात बिन मौसम लाई है | डाकिया कितने दिन बाद,दहलीज़ पर आया दूर परदेस से, सजन का खत सन्देस लाया | खत जब खोला तो, सारे गुलाब के फूल है खत सिर… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: खत लिखने की रस्म नयनो में ये घटा,आज फिर घिर आई है खुशियों की बरसात बिन मौसम लाई है | डाकिया कितने दि … more →