Blogs about: ख़त
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उम्मीद है हम तुम मिलेंगे
उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये दीप जलेंगे जब बसंत की धूप महकेगी उम्म… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
उम्मीद है हम तुम मिलेंगे
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये … more »
तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे
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Amarjeet Singh wrote 1 month ago: तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे, ज … more »
तुम न समझोगे
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे … more »
वह शाम फिर आयी
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वह शाम फिर आयी वह गुलाबी चाँद फिर आया व … more »
याद आती हैं फिर वह तारीख़ें
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: याद आती हैं फिर वह तारीख़ें मेरा करना … more »
यह कोरे काग़ज़
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल की बात जैसे य … more »
इल्तिहाबे-दर्द से जलता है कलेजा
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: इल्तिहाबे-दर्द से जलता है कलेजा कभी ते … more »
पिछला कुछ भी बदला नहीं जा सकता
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: बीते दिनों की गलियों में जब पाँव पड़ते … more »
