विनय wrote 1 year ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई कि … more →
विनय wrote 1 year ago: चाँद गवाह है मेरे प्यार का क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का कुछ न ख़बर हुई उस पल की कुछ न पता चला उस … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी यादों के साये तले जाने हम- कितनी दूर तक चले क्या ख़बर कब… थकते क़दमों की शाम ढले जाने कब प … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी यादों के, तेरे ख़ाबों के, साये तले हम कितनी दूर निकल आये, कहाँ चले तेरी यादों की धुँधली शाम … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ुदाया1 कभी करम मुझ पर भी सुम्बुल2 की थोड़ी मेहर इधर भी प्यार क्या है नहीं जानता मैं मगर सिखा दे मु … more →