रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका चाँद को कभी बादलों से उठाया भी गदेली पर रखकर उसे कभी होंटों तक लाया भी रातभर चाँद देखा किये माज़ी मे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 11 months ago: रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका … more →
विनय wrote 1 year ago: एक ख़ामोश अफ़साना जो तुम्हारी नज़रों ने सुनाया है मुझे काश! वह तुम अपने लबों से मेरे लबों पर लिखती कभी … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ामोश निगाह तेरी क्या बातें करती है आँखों में रहती है व नींदों में बहती है दिल की बात करें क्या एक … more →
विनय wrote 1 year ago: जो दिल से जाता नहीं है तू वह गीत है जो दिल में आकर बसा था तू वह मीत है साँसों की सरगम बस तुम ही तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको बड़े दिन हुए कोई रुलाये मुझको अपना अब कहूँ किसे कोई नहीं मेरा ख़ुशी … more →
विनय wrote 2 years ago: बहुत उदास-सी एक शाम बैठी है मेरे साथ अपने ख़ामोश लबों से कह देती है अनकही बातें दोनों बहुत देर तक बै … more →