न रखो वह तस्वीरें हरी जिनसे दिल दुखता हो कर दो वह ज़मीनें बंजर जिनमें घाव उगता हो क्यों सीने में साँस लेवे दर्द किसी बेदर्द का मिटा दो वह शोलए-दाग़ भी जिससे दिल जलता हो लुत्फ़ लो उस बात में जिसमें न हो म… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: न रखो वह तस्वीरें हरी जिनसे दिल दुखता हो कर दो वह ज़मीनें बंजर जिनमें घाव उगता हो क्यों सीने में साँस … more →