Blogs about: ख़िज़ाँ

वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है

विनय wrote 1 year ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस इतने ही! ख़िज़ाँ आयी बहार लौट गयी निशान रह गये इतने ही उसने न … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, वक़्त, time, Reminisce, याद, दीवाना, बहार, सदा

तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे2 comments

विनय wrote 1 year ago: तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे जैसे मेरी सदा तुम्हें जो दीवारें ख़ुद-ब-ख़ुद गिरती हैं मैं कैसे चुनावाऊँ … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, दर्द, Love, Reminisce, तन्हाई, प्यार, याद, मोहब्बत

ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी

विनय wrote 1 year ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ाने लगी दरख़्त की शाख़ों पर धूप की बूँदें नहीं सूरज का दरिया है … more →

Tags: मेरा गीत, Earth, Tree, ज़िन्दगी, बूँद, चाँद, धूप, इश्क़, Love

वह बारिश की छीटें

विनय wrote 1 year ago: वह बारिश की छीटें वह बारिश की बूँदें फिर याद आने लगीं, ख़ामोशी तेरी आँखों की हलचल तेरे होंटों की फिर … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, बूँदें, शाम

कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब

विनय wrote 1 year ago: कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब दामने-ग़म में लौट गयी ख़िज़ाँ अब देखो उस रात पर शिगाफ़ आने लग गये असरका … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, ग़म, मोहब्बत, रात


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