मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा, तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’ अभी-अभी मेरी मुट्ठी में जन्मी है यह क़िस्मत खुलेगी जो कई और कई हासिलों के मुक़ाम आयेंगे जिससे मेरी हर सोच जुड़ी ह… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा, तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’ अभी-अभी मेर … more →