विनय wrote 1 year ago: जब भी तेरा नाम लेती हैं बहुत ख़ुश होती हैं आँखें मुस्कुराती हैं तेरे लबों से कहीं ज़्यादा हसीं होके … more →
विनय wrote 1 year ago: दूदे-तन्हाई के उस पार क्या है वह ख़ुद है या उसके हुस्न की ज़या है बेवजह किसी की याद यूँ सताती नहीं मे … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमको न पाया तो खोया भी कुछ नहीं पत्थर है दिल मेरा नहीं सच नहीं मुझको यक़ीं ख़ुद पे नहीं है सनम दूर र … more →
विनय wrote 1 year ago: अगर आँख रोये और दिल सिसकियाँ भरे तो भला बोलो आशिक़ ऐसे में क्या करे इक वो दिन था इक ये आज का दिन है म … more →