रोज़े – शामे – दीवाली कोई नूरे – चराग़ नहीं चौखट सूनी दिल वीराँ तन्हा - तन्हा रहता है पलकों पर शबनम के क़तरे फीका-फीका चाँद और गली में सब सूखा-सूखा बंजर-सा रहता है न फूल… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: रोज़े – शामे – दीवाली कोई नूरे – चराग़ नहीं चौखट सूनी दिल वीराँ तन्हा - … more →