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शीशाए-अश्क आते रहे

विनय wrote 1 year ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलाते रहे हम दीवानों की ख़ैर भला कौन पूछे लोग आते-जाते रहे हम रखते … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, अश्क, इल्ज़ाम, ख़ुदा हाफ़िज़, ग़लत, दर्द, दीवाना, दोस्ती, पास