विनय प्रजापति wrote 5 months ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: जब आसमाँ पे यह हिलाल आया मुझे याद तुमस … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: क्या वह तुम थे जो आँखों को महका गये तमन … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: रक़ाबी चाँद जला दो यह रात चाँदनी हो जाय … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं तुझे चाहा … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: चाँद गवाह है मेरे प्यार का क्या यही ख़ … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: मेरी बाइसे-ज़ीस्त, तुमको इक नज़र देखने क … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: दिल, मिलें कैसे कोई तो रास्ता दे क़ुछ यक़ … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: दिल के दरवाज़े पर दस्तक देता है कोई रोज़- … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: शाम गहरी हो रही थी सुनहरा चाँद बादलों … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: तुम्हें महसूस हो कि ना हो मेरे सीने मे … more →