जंगल की आग की तरह फैलती विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी करोड़ों मेहनतकशों के रोज़गार निगल चुकी है पूँजीवाद के पास इस संकट से निकलने का कोई उपाय नहीं विश्व पूँजीवाद के तमाम सरगनाओं की हरचंद कोशिशों के बावज… more →
बिगुलShaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 months ago: जंगल की आग की तरह फैलती विश्वव्यापी आर्थिक मन्दी करोड़ों मेहनतकशों के रोज़गार निगल चुकी है पूँजीवाद … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 months ago: नवउदारवादी अर्थनीति के 18 वर्ष 18 वर्षों पहले नरसिंह राव की सरकार ने जब उदारीकरण-निजीकरण की नीतियों … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 8 months ago: ‘आह्वान’ अक्टूबर-दिसम्बर २००८ से साभार -अभिनव वर्ष २००७ और २००८ कई मायनों में पूंजीवाद … more →
cpimlnd wrote 1 year ago: बढ़ते खाद्य संकट तथा बढ़ती कीमतों की मुख्य दोषी केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा लागू की जा रही नयी आर … more →