शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे वह मुझको मिले और मिले भी ना चाँद खिड़क… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 5 months ago: शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: यह कोरे काग़ज़ करते हैं दिल की बात जैसे य … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: शाम गहरी हो रही थी सुनहरा चाँद बादलों … more →