खोया-खोया फिरता हूँ तेरे बिना ज़िन्दगी तू जो मिल जाये मुझे सँवर जाये ज़िन्दगी तू नहीं तो कुछ नहीं कुछ भी नहीं क़सम है तुझे मेरी अब आ भी जा तू गयी इतनी दूर मैं रहा तुझको ढूँढ़ प्यार का है असर ओ मेरी जाने-… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: खोया-खोया फिरता हूँ तेरे बिना ज़िन्दगी तू जो मिल जाये मुझे सँवर जाये ज़िन्दगी तू नहीं तो कुछ नहीं कुछ … more →