तेरी इक नजर को तरसे है ये नैना पर तू ना जाने कहाँ गुम है। ख्वाबो मे इक झलक दिखलाकर फिर से ना जाने कहाँ गुम है। तुझसे ना दूर होंगे ऐसा तेरा वादा था पर हर वादा भूलकर तू ना जाने कहाँ गुम है । … more →
कुछ िदल सेGaurav Sangtani wrote 2 months ago: जिंदगी यूँ चली, होके खुद से खफ़ा | पाके भी खो दिया, हमने सब हर दफ़ा || कोई साथी नहीं, कोई संग ना चला … more →
Gaurav Sangtani wrote 5 months ago: कैसे कह दूं कि तेरी याद नही आती है, मेरी हर सांस मे बस तू ही महकाती है. आज भी रातों को जब चौंक के … more →
ambuj wrote 6 months ago: ख्वाबो की क्यारी है फूलो से न्यारी है रात की चाँदनी चकोर की दीवानगी और सपनो की रवानगी है प … more →
Gaurav Sangtani wrote 8 months ago: कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..??? कुछ बातों का कोई कारण नही होता कोई अर्थ नहीं हो … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: चलने को ताज महल भी चल जाता है हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है त … more →
Gaurav Sangtani wrote 10 months ago: दिल्ली धमाको क़ी खबर देखी तो कुछ सवाल से फिर से घूमने लगे जहन में…. सोचा कुछ लिखू…. पर … more →
Gaurav Sangtani wrote 10 months ago: जाने किसके के शेर है….. पर अच्छे लगे सो बाँट रहा हूँ……. कितना खुश्फहम कोई इंसान हो … more →
Gaurav Sangtani wrote 10 months ago: आइए सुने एक नज़्म जो ना जाने किसने लिखी है… पर बहुत कुछ कहती है.. http://gauravsangtani.po … more →
Gaurav Sangtani wrote 11 months ago: राह आसान हो गई होगी जान पहचान हो गई होगी फिर पलट कर निगाह नहीं आई तुझ पे क़ुरबाँ हो गई होगी … more →
amitabh14 wrote 11 months ago: ख्वाबों के शहर को ढूँढने निकला हूँ .ख्वाब इतने हसीं कैसे होते हैं .रात में आ जाए तो फिर दिन में भी आ … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है दीवाने भी कहते हैं की दीवाना हुआ है रिश्ता था तभी तो किसी बेद … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: आओ आज नाम बदल लें…! ले लो इस नाम से जुड़ी सब दौलत और शौहरत, मुझे बेनामी का सुकून लौटा दो … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: क्या लिखूं…. पैगाम लिखूं… तुझे जज़्बात लिखूं… या अपने ये हालात लिखूं…. क्या … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: गीले काग़ज़ क़ी तरह है ज़िंदगी अपनी,कोई जलाता भी नहीं और कोई बुझाता भी नहीं |इस कदर अकेले हो गये हैं … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: कुछ शेर धुंधले से…. कहीं सुने थे कभी…. जिन्होने भी लिखे हैं उन्हे सलाम… १. तेरी या … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: हम को तो गर्दिश-ए-हालात पे रोना आया रोने वाले तुझे किस बात पे रोना आया कैसे मर-मर के गुज़ारी है तु … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: आज अश्कों का तार टूट गया रिश्ता-ए-इंतज़ार टूट गया यूँ वो ठुकरा के चल दिए गोया इक खिलौना था प्यार टू … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: खुदा हम को ऐसी खुदाई ना दे कि अपने सिवा कुछ दिखाई ना दे ख़तावार समझेगी दुनिया तुझे अब इतनी भी ज़्य … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: पास आकर भी फ़ासले क्यों हैं | राज़ क्या है, समझ मे ये आया || उस को भी याद है कोई अब तक | मैं भी तुमक … more →