ख्वाबों के शहर को ढूँढने निकला हूँ .ख्वाब इतने हसीं कैसे होते हैं .रात में आ जाए तो फिर दिन में भी आंखों में बसे रहते है .कभी कभी ये आंखों में चुभ भी जाते है . लेकिन ये न हों तो जिंदगी में इतने रंग भी… more →
ख्वाबों की चादरMaheep Saraf wrote 2 weeks ago: आज कुछ होश नहीं बस तेरी यादें हैं साथ में तेरी आँखें तेरी बातें तेरी खुश्बू मेरी हर बात में हर ख्व … more →
Gaurav Sangtani wrote 2 months ago: आज बिछड़े हैं कल का डर भी नहीं जिंदगी इतनी मुख्तसर भी नहीं ज़ख़्म दिखते नहीं अभी लेकिन ठंडे होगे तो … more →
skbahadi wrote 4 months ago: ख्वाब देखता हूँ इसलिए की यह हकीकत नहीं ख्वाइश्मन्द हूँ ख्वाब का हकीकत का नहीं हकीकत देख कर क्या होगा … more →
Gaurav Sangtani wrote 4 months ago: भीनी भीनी सी खुशबु तेरी, महका महका सा एहसास है… | एक अरसा हुआ तुझको देखे हुए… पर तू हर ल … more →
Gaurav Sangtani wrote 7 months ago: जिंदगी यूँ चली, होके खुद से खफ़ा | पाके भी खो दिया, हमने सब हर दफ़ा || कोई साथी नहीं, कोई संग ना चला … more →
Gaurav Sangtani wrote 9 months ago: कैसे कह दूं कि तेरी याद नही आती है, मेरी हर सांस मे बस तू ही महकाती है. आज भी रातों को जब चौंक के उठ … more →
ambuj wrote 10 months ago: ख्वाबो की क्यारी है फूलो से न्यारी है रात की चाँदनी चकोर की दीवानगी और सपनो की रवानगी है पल में जीना … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..??? कुछ बातों का कोई कारण नही होता कोई अर्थ नहीं हो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चलने को ताज महल भी चल जाता है हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है ता … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: दिल्ली धमाको क़ी खबर देखी तो कुछ सवाल से फिर से घूमने लगे जहन में…. सोचा कुछ लिखू…. पर … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: जाने किसके के शेर है….. पर अच्छे लगे सो बाँट रहा हूँ……. कितना खुश्फहम कोई इंसान हो … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: आइए सुने एक नज़्म जो ना जाने किसने लिखी है… पर बहुत कुछ कहती है.. http://gauravsangtani.podo … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: राह आसान हो गई होगी जान पहचान हो गई होगी फिर पलट कर निगाह नहीं आई तुझ पे क़ुरबाँ हो गई होगी तेरी … more →
amitabh14 wrote 1 year ago: ख्वाबों के शहर को ढूँढने निकला हूँ .ख्वाब इतने हसीं कैसे होते हैं .रात में आ जाए तो फिर दिन में भी आ … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: बदनाम मेरे प्यार का अफ़साना हुआ है दीवाने भी कहते हैं की दीवाना हुआ है रिश्ता था तभी तो किसी बेदर् … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: आओ आज नाम बदल लें…! ले लो इस नाम से जुड़ी सब दौलत और शौहरत, मुझे बेनामी का सुकून लौटा दो … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: क्या लिखूं…. पैगाम लिखूं… तुझे जज़्बात लिखूं… या अपने ये हालात लिखूं…. क्या … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: गीले काग़ज़ क़ी तरह है ज़िंदगी अपनी,कोई जलाता भी नहीं और कोई बुझाता भी नहीं |इस कदर अकेले हो गये हैं … more →
Gaurav Sangtani wrote 1 year ago: कुछ शेर धुंधले से…. कहीं सुने थे कभी…. जिन्होने भी लिखे हैं उन्हे सलाम… १. तेरी या … more →