Blogs about: गली

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मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा

विनय wrote 1 year ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा जिस बाज़ार में ग़म बिकते हों उसे दिनो-दोपहर ढूँढ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, बाज़ार, शाम

जाने किस गली में1 comment

विनय wrote 1 year ago: जाने किस गली में, मैं चाँद भूल आया हूँ जाने किस गली में चाँद मुझे भूल आया है तन में जो जलती है रफ़्ता … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, चाँद, इश्क़, Love, तन्हाई, प्यार, मोहब्बत, Solitude, Moon

उसकी गली में यारों आज उससे सामना है

Rohit Jain wrote 1 year ago: उसकी गली में यारों आज उससे सामना है कहीं हाथ से ना जाये इस जाँ को थामन है पहले तो इस जहाँ ने हँसना ब … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Mar 2007, 2007, आज, उसकी, उससे, कविता, गज़ल

रोज़े-शामे-दीवाली कोई नूरे-चराग़ नहीं

विनय wrote 1 year ago: रोज़े – शामे – दीवाली   कोई   नूरे – चराग़  नहीं चौखट   सूनी   दिल   वीराँ   तन्हा - … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Alone, आतिश, इश्क़, ख़ुष्क, चाँद, चौखट, तन्हा, प्यार

तेरे चेहरे पर अपनी नज़र ढूँढ़ते हैं

विनय wrote 1 year ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अपनी दुआ में असर ढूँढ़ते हैं तुम देखकर हँसते हो मुझे और हम तेर … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, असर, इश्क़, कोहरा, चाहत, दुआ, धूप, नगर, नज़र

सड़कों के साथ चल रहा हूँ

विनय wrote 1 year ago: सौंधी हुई एक खु़शबू मेरी आँखों में आकर सो गयी है कभी भर जो आती है आँख सारा मंज़र महका देती है… … more →

Tags: मेरी नज़्म, apart, अंजान, आंखें, इश्क़, ख़त्म, खु़शबू, तलाश, निशाँ

हमारा वाक़िया

विनय wrote 1 year ago: वो तस्कीं न मेरे दर पे माथा टेके न ही रौज़न से झाँके सिर्फ़ - खा़बों को बे-रब्त किए घूमती है हर गली हर … more →

Tags: मेरी नज़्म, ख़ाब, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, Friendship, वफ़ा, dream


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