उसकी गली में यारों आज उससे सामना है कहीं हाथ से ना जाये इस जाँ को थामन है पहले तो इस जहाँ ने हँसना बनाया मुश्किल रोने भी अब ना देंगे के ये भी तो अब मना है किसको बताऊँ मुजरिम किस पर करूँ मुकदमा हर हाथ … more →
इक शायर अंजाना सा...विनय wrote 1 year ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा जिस बाज़ार में ग़म बिकते हों उसे दिनो-दोपहर ढूँढ … more →
विनय wrote 1 year ago: जाने किस गली में, मैं चाँद भूल आया हूँ जाने किस गली में चाँद मुझे भूल आया है तन में जो जलती है रफ़्ता … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: उसकी गली में यारों आज उससे सामना है कहीं हाथ से ना जाये इस जाँ को थामन है पहले तो इस जहाँ ने हँसना ब … more →
विनय wrote 1 year ago: रोज़े – शामे – दीवाली कोई नूरे – चराग़ नहीं चौखट सूनी दिल वीराँ तन्हा - … more →
विनय wrote 1 year ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अपनी दुआ में असर ढूँढ़ते हैं तुम देखकर हँसते हो मुझे और हम तेर … more →
विनय wrote 1 year ago: सौंधी हुई एक खु़शबू मेरी आँखों में आकर सो गयी है कभी भर जो आती है आँख सारा मंज़र महका देती है… … more →
विनय wrote 1 year ago: वो तस्कीं न मेरे दर पे माथा टेके न ही रौज़न से झाँके सिर्फ़ - खा़बों को बे-रब्त किए घूमती है हर गली हर … more →