जीवन की नदी गहरी है, जो ना कभी ठहरी है, लहर लहर बहती है, सुख-दुख के किनारे छूती रहती है। जीविका की नाव चलती है, परिश्रम से दौड़ती है। थकते ही रुकनी शुरु हो जाती है, लहरों के थपेड़ों से थोड़ा ही चल पाती ह… more →
पसंदAmarjeet Singh wrote 1 year ago: झील सी गहरी इन निगाहों मे डूब जाने को जी चाहता है, न चाहकर भी इन निगाहों से दूर चले जाने को जी चाहता … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: जीवन की नदी गहरी है, जो ना कभी ठहरी है, लहर लहर बहती है, सुख-दुख के किनारे छूती रहती है। जीविका की न … more →