श्री आर. पी. शर्मा ‘महर्षि’ काफ़िये का सिलसिला आगे. सहारे के लिये तिनका बहुत है तिमिर में ज्योति की आशा बहुत है. यदि मतले में यादगार – साज़गार को काफ़िये बनाया जाता है, तो वे इसलिये … more →
चराग़े-दिलDevi Nangrani wrote 1 year ago: श्री आर. पी. शर्मा ‘महर्षि’ काफ़िये का सिलसिला आगे. सहारे के लिये तिनका बहुत है तिमिर मे … more →
Devi Nangrani wrote 1 year ago: एक परिचयःश्री आर. पी. शर्मा ‘महर्षि’ ग़ज़ल के अन्य काफ़िये, मत्ले में नियमानुसार प्रयुक्त काफ़ियों प … more →
Devi Nangrani wrote 1 year ago: एक परिचयः श्री आर. पी. शर्मा ‘महर्षि’ ग़ज़ल एक सुकोमल विधा है. वह नफ़ासत पसंद है. हाथ लग … more →
Devi Nangrani wrote 1 year ago: आर.पी शर्मा महर्षि को “पिंगलाचार्य” की उपाधि गुफ्तगू (जनवरी-मार्च २००५)में अदबी खबरों के … more →
Devi Nangrani wrote 1 year ago: “ग़ज़ल-लेखन कला” के कुछ चुनिंदा अंश प्रस्तुत है श्री आर.पी. शर्मा “महर्षि” की … more →
Devi Nangrani wrote 1 year ago: श्री आर.पी. शर्मा का जन्म ७ मार्च १९२२ ई को गोंडा में (उ.प्र.) में हुआ। शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त श … more →