Blogs about: ग़म
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ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया सरे-राह मैं अपनी मंज़िल पा गया चराग़… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग … more »
आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा च … more »
किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी फिर हल्की- … more »
मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सह … more »
तुम न समझोगे
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे … more »
एक तसल्ली
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: एक तसल्ली मेरे पाँव के नीचे से गुज़रती … more »
वह शाम फिर आयी
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वह शाम फिर आयी वह गुलाबी चाँद फिर आया व … more »
तेरी तस्वीर से बातें करता
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तेरी तस्वीर से बातें करता रोज़ मैं पास … more »
मैं अगर एक तरफ़ा हूँ
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं अगर एक तरफ़ा हूँ तो यह भी सही इस बद्त … more »
आज फिर आसमाँ पे
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: आज फिर आसमाँ पे देखा चाँद, गुलाबी चाँद … more »
हज़ारों की भीड़ में हम अकेले
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: हज़ारों की भीड़ में हम अकेले रह गये जिस … more »
तू एक बार देख ले पीछे मुड़के
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तू एक बार देख ले पीछे मुड़के हम हैं वही … more »
राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनामी में
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनाम … more »
नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही वह जो है मा … more »
ख़ाब में लम्स था सुम्बुल का
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: ख़स्ताहाल है जो तेरा बीमार क्यों नहीं … more »
अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा दे … more »
ज़िन्दगी माने हो तुम
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: ज़िन्दगी माने हो तुम साँसें तुम्हारा ए … more »
