और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 5 months ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फ … more →
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलात … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: उसकी आँखों ने मुझे पहचाना तो मगर एक डर … more →