ढूंढता हूँ खुशियाँ जमाने भर के लिये ! कुछ तो समाँ कर लूं अपने घर के लिये !! मुफ़लिसी से भी मै आराम पा जाता, पास जो दाम होते ज़हर के लिये ! मर्तब उसके जमाने से जुदा हैं, कुछ तो पास हो उसकी नज़र के लिये ! … more →
दिल की ज़मीं पररविकुल wrote 5 months ago: ढूंढता हूँ खुशियाँ जमाने भर के लिये ! कुछ तो समाँ कर लूं अपने घर के लिये !! मुफ़लिसी से भी मै आराम पा … more →
रविकुल wrote 5 months ago: ताउम्र मैं उसका नाम करता रहा ! पर वो मुझको बदनाम करता रहा !! इक अर्सा बीत गया मैंने सहर नहीं देखी, म … more →
रविकुल wrote 6 months ago: दिल की ज़मीं पर जज़्बातों को दिल के मैंने, तुमसे अभी कहा नहीं है ! नाम तेरा दिल की ज़मीं , पर मैंने अभी … more →