. . . अम्माँ, आज जब तुम दिया जलाओगी तो मुझे पता है कि आंसुओं को रोके रखोगी। दो बेटे, बहुएँ, नतिनियाँ और पोते लेकिन बरम बाबा के बगल का गँवारू मकान सूना रहेगा। अकेले पिताजी से इधर उधर की बातें कर अपना औ… more →
वर्ड प्रेस पर आलसीaradhana wrote 3 days ago: आसमान की ओर देखता हुआ घुरहू केवट खुश है गाँववालों तुम भले ही मत आने दो नहर का पानी मेरे खेतों तक पर … more →
गिरिजेश राव wrote 2 months ago: . . . अम्माँ, आज जब तुम दिया जलाओगी तो मुझे पता है कि आंसुओं को रोके रखोगी। दो बेटे, बहुएँ, नतिनियाँ … more →
गिरिजेश राव wrote 2 months ago: पिछले भाग बाउ, क़ुरबानी मियाँ और दशहरा -1 से जारी .. (उ) सबेर के बेरा भैंस खोलने में देर हो गई थी, ल … more →
ambuj wrote 6 months ago: जब भोजपुरी गाना के बात होला त एगो गाना हमेशा याद कईल जाला, “कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया … more →
ambuj wrote 8 months ago: कुछ दिन पहिले मनोज तिवारी के एगो गाना आइल रहे, “चलल कर ये बबुनी वोढ्नी संभाल के” ! मतलब … more →
pryas wrote 11 months ago: एक संत किसी गांव में पहुंचे। गांव के लोगों के आग्रह पर वह वहीं एक कुटिया बनाकर रहने लगे। उनका खाना ज … more →