बरसों के बाद कभी हम तुम यदि मिलें कहीं, देखें कुछ परिचित से, लेकिन पहिचानें ना। याद भी न आये नाम, रूप, रंग, काम, धाम, सोचें,यह सम्भव है - पर, मन में मानें ना। हो न याद, एक बार आया तूफान, ज्वार बंद, मि… more →
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!Rewa Smriti wrote 1 year ago: बरसों के बाद कभी हम तुम यदि मिलें कहीं, देखें कुछ परिचित से, लेकिन पहिचानें ना। याद भी न आये नाम, रू … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: छाया मत छूना मन, होता है दुख दूना। जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी छवियों की चित्र-गंध फैली मनभाव … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: लाल पत्थर लाल मिटृटी लाल कंकड़ लाल बजरी लाल फूले ढाक के वन डाँग गाती फाग कजरी सनसनाती साँझ सूनी वायु … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: बीत गया संगीत प्यार का, रूठ गयी कविता भी मन की । वंशी में अब नींद भरी है, स्वर पर पीत सांझ उतरी है ब … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: हम होंगे कामयाब एक दिन मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास हम होंगे कामयाब एक दिन हम चलेंगे साथ-साथ ड … more →