नै१ बुलबुले-चमन न गुले-नौदमीदा२ हूँ मैं मौसमे-बहार में शाख़े-बरीदा३ हूँ गिरियाँ न शक्ले-शीशा व ख़ंदा न तर्ज़े-जाम४ इस मैकदे के बीच अबस५ आफ़रीदा६ हूँ तू आपसे७ ज़बाँज़दे-आलम८ है वरना मैं इक हर्फ़े-आरज़ू… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 3 months ago: नै१ बुलबुले-चमन न गुले-नौदमीदा२ हूँ मैं मौसमे-बहार में शाख़े-बरीदा३ हूँ गिरियाँ न शक्ले-शीशा व ख़ंदा … more →
विनय wrote 2 years ago: वो जिसे इश्क़ कहता था वाइज़1 हम उसमें फँस गये बहाये इतने आँसू कि जहाँ खड़े थे वहीं धँस गये न जिगर से ल … more →