दर्द में भी ज़िन्दगी को जीते जायेंगे। ज़िन्दगी के क़र्ज़ को हम यूँ चुकायेंगे॥ लक्ष्य लेके रास्तों पे बढ़ते जायेंगे, ढूँढ़ लेंगे मंजिलें या निशां बनायेंगे, … more →
अनुभूति कलशramadwivedi wrote 5 days ago: दर्द में भी ज़िन्दगी को जीते जायेंगे। ज़िन्दगी के क़र्ज़ को हम यूँ चुकायेंगे॥ … more →
kalapiketan wrote 6 days ago: लाज ओढूं (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →
ramadwivedi wrote 1 week ago: गर्मी की ऋतु ऐसी जिसमें साजन भये विदेशी सारे ए.सी. बन्द पड़े कैसे कैसे समय कटे। तन जलता मन बहुत मचलता … more →
ramadwivedi wrote 1 week ago: पूज्य श्री गुरु ग्रन्थ साहिब सर्व गुणों की खान है, खालसा की शान है यह गीता और कुरान है। … more →
ramadwivedi wrote 4 weeks ago: दर्द देके वे हमें खुद ही दवा देते हैं, रूठ जाने पे हमें खुद ही मना लेते हैं। मेरी … more →
ambuj wrote 1 month ago: जब भोजपुरी गाना के बात होला त एगो गाना हमेशा याद कईल जाला, “कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: घनश्याम ठक्कर (Ghanshyam Thakkar = Oasis Thacker) परिचय Latest Posts ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત … more →
prativanepal wrote 1 month ago: रिसाउँदा आगो हुन्छौ खुशी हुँदा पानी शायद यस्तै हुन्छ क्यारे माया गर्ने बानी घुर्क्याउँछौ कहिले काही … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: मिलेगा (गीत-काव्य) घनश्याम ठक्कर Latest Posts ગુજરાતી કવિતા અને સંગીત હોઈ શકું (મુક્તક) – રમેશ પા … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 month ago: भनक पड़े झरती बूंदों की खिड़की बन्द किया करता कलरव पंछी का सुन कर भी कितना बोर हुआ जाता हूँ रिसने लगे … more →
ramadwivedi wrote 1 month ago: किसी के दरमियाँ यूँ ही नहीं आतीं हैं तलखियाँ, कोई तो बात होती है गिरातीं हैं बिजलियाँ। … more →
prativanepal wrote 2 months ago: बलेसिमा पानी झर्यो बर्षा लाग्यो कि आँखाबाट आँसु झर्यो माया मार्यो कि सम्झनाको आंधी चल्यो बढ्यो याद … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 months ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →
ramadwivedi wrote 2 months ago: वहशी दरिंदों ने जीना दुश्वार कर दिया है, कच्ची कलियों का खिलना ख़्वाब कर दिया है। … more →
ramadwivedi wrote 2 months ago: नहीं भाया उनको मेरा मुस्कराना। दिया आंसुओं का मुझे नज़राना॥ सरल सा समर्पण नहीं भाया … more →
prativanepal wrote 2 months ago: ”गीत ” आचार्य प्रभा आँखाबाट झर्यो याद आसुँ बनेर गएथ्यौ मलाई छाडि आउँछु भनेर …. … more →
ramadwivedi wrote 3 months ago: रेत के समन्दर सी है यह ज़िन्दगी, तूफ़ां अगर आ जाए बिखर जाए ज़िन्दगी। … more →
ambuj wrote 3 months ago: जबे भोजपुरी संगीत के बात होला एगो गाना सबका जुबान पे आ जाला, “गंगा किनारे मोरा गाँव हो” … more →
prativanepal wrote 3 months ago: कुर्दा कुर्दै जिन्दगी यो लेऊ लागी सक्यो मन भरीका वैश रहर छेऊ लागी सक्यो बल्ल फूल्छ मनम … more →