जब भी यह दिल उदास होता है जाने कौन आस-पास होता है होंठ चुपचाप बोलते हों जब सांस कुछ तेज़-तेज़ चलती हो आंखें जब दे रही हों आवाज़ें ठंडी आहों में सांस जलती हो आँख में तैरती हैं तसवीरें तेरा चेहरा तेरा ख… more →
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!Praful wrote 9 months ago: मुंबई की पृष्ठभूमि पर बनी स्लमडॉग मिलियनेयर ऑस्कर पुरस्कारों में छा गई है. इसे सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म और … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 10 months ago: ::———————— गुलज़ार हिंदुस्तान में दो दो हिंदुस्तान … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 10 months ago: चिपचिपे दूध से नहलाते हैं आंगन में खड़ा कर के तुम्हें । शहद भी, तेल भी, हल्दी भी, ना जाने क्या क्या … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ उठता तो है घटा सा बरसता नहीं धुआँ चूल्हा नहीं जलाये या बस् … more →
Rewa Smriti wrote 1 year ago: जब भी यह दिल उदास होता है जाने कौन आस-पास होता है होंठ चुपचाप बोलते हों जब सांस कुछ तेज़-तेज़ चलती ह … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: नज़्म उलझी हुई है सीने में मिसरे अटके हुए हैं होठों पर उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह लफ़्ज़ काग़ज़ … more →
Rewa Smriti wrote 2 years ago: आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ उठता तो है घटा सा बरसता नहीं धुआँ चूल्हा नहीं जलाये या बस् … more →