आ देख मेरी पेशानी को तक़दीर के हरफे लिक्खे हैं पैरों के निशाँ जब देखे जहाँ सौ बार झुकाया सर को वहाँ (पेशानी =माथा, तकदीर = किस्मत, हरफे = वाक्य) गुलजार साहब के ये बोल बहुत ही अनोखे हैं। फिल्मी गीतों … more →
आईनाVision Raval wrote 3 months ago: … more →
Vision Raval wrote 3 months ago: … more →
जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: आ देख मेरी पेशानी को तक़दीर के हरफे लिक्खे हैं पैरों के निशाँ जब देखे जहाँ सौ बार झुकाया सर को वहाँ … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: गुलजार साहब जब गीत लिखते हैं तो कई बार बोल पकड़ में नहीं आते। खास कर जब संगीत ए आर रहमान या शंकर एहसा … more →