आ देख मेरी पेशानी को तक़दीर के हरफे लिक्खे हैं पैरों के निशाँ जब देखे जहाँ सौ बार झुकाया सर को वहाँ (पेशानी =माथा, तकदीर = किस्मत, हरफे = वाक्य) गुलजार साहब के ये बोल बहुत ही अनोखे हैं। फिल्मी गीतों के… more →
आईनाShivam Misra wrote 2 months ago: ऑस्कर विजेता गुलजार को सिनेमा जगत में उनके योगदान के लिए 11वें ओसियान सिने फिल्म समारोह में लाइफटाइम … more →
Vision Raval wrote 8 months ago: … more →
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जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: आ देख मेरी पेशानी को तक़दीर के हरफे लिक्खे हैं पैरों के निशाँ जब देखे जहाँ सौ बार झुकाया सर को वहाँ ( … more →
जगदीश भाटिया wrote 2 years ago: गुलजार साहब जब गीत लिखते हैं तो कई बार बोल पकड़ में नहीं आते। खास कर जब संगीत ए आर रहमान या शंकर एहसा … more →