रक़ाबी चाँद जला दो यह रात चाँदनी हो जाये कभी तो पास बुला लो तेरी नज़दीकियों का मुझे एहसास हो जाये गुलाबी शाम ढलती है रोज़ गुज़रती हो मेरे घर के सामने से मैं दिल थाम के बैठा रहता हूँ आइना जब भी हो हाथों मे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: रक़ाबी चाँद जला दो यह रात चाँदनी हो जाये कभी तो पास बुला लो तेरी नज़दीकियों का मुझे एहसास हो जाये गुला … more →