किसी भी रोग के मूल में व्यक्ति के भाव ही होते हैं। शरीर की विभिन्न ऊर्जाओं का संचलन भावों के द्वारा ही प्रतिपादित होता है। भावों के कारण ही ऊर्जाएं सन्तुलित रहती हैं और ऊर्जाओं का असन्तुलन ही रोगों का… more →
Gulabkothari's Bloggulabkothari wrote 1 month ago: किसी भी रोग के मूल में व्यक्ति के भाव ही होते हैं। शरीर की विभिन्न ऊर्जाओं का संचलन भावों के द्वारा … more →
gulabkothari wrote 1 month ago: कि मां कहती है लडका अच्छा है मेरा मान करता है मित्रता चाहता है किंतु डरती हूं मैं आगे बढने से जानती … more →
gulabkothari wrote 1 month ago: महाराष्ट्र में एक विधायक को राष्ट्र भाषा में शपथ लेने के कारण पार्टी विशेष के विधायकों की आक्रामकता … more →
gulabkothari wrote 1 month ago: श्रवण हमारी अतीव शक्तिशाली इन्द्रिय है। सुनी हुई बात यदि मन मे घर कर जाती है तो बरसों तक हमारे कान म … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: भारत आज एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। उसे अपनी क्षमता सिद्ध करते हुए शिखर पर भी पहुंचना है और स्वा … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: उलूक यानी उल्लू, लक्ष्मी का वाहन। जो लक्ष्मी के साथ रहकर भी अंधेरे को प्रकाश मानकर विचरण करे, वही उल … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: पशुभाव है कर्म ज्ञान के बिना ज्ञान भी बन जाता है विष बिना उपयोग के। पैदा किसने किया अज्ञान को कौन कर … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: षोडषी अथवा स्वीट सिक्सटीन की अवधारणा इसलिए महत्वपूर्ण है कि जन्म के बाद प्रतिवर्ष एक-एक कला का पूर्ण … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: लता मंगेशकर का नाम स्वयं में एवरेस्ट शिखर है। गायकी का पर्यायवाची बन गई हैं। करोडों लोग जिसकी प्रशंस … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: समाज की इकाई है—परिवार और परिवार की इकाई है—व्यक्ति। व्यक्ति अच्छे होंगे तो परिवार भी अच्छा होगा। स … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: हमारे देश में पौराणिक देवियों को षोडशी माना जाता है। कहा जाता है कि इनकी आयु सदा सोलह साल की ही रहती … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: व्यक्ति का जीवन भावों के आधार पर चलता है। भाव ही जीवन का स्वरूप तय करते हैं, जीवन को गति प्रदान करते … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: जीवन में व्यवहार के दो धरातल हैं। एक ज्ञान प्रधान और दो, क्रिया प्रधान। ज्ञान प्रधानता में- संकल्प, … more →
gulabkothari wrote 3 months ago: ज्ञान और कर्म अलग नहीं हैं। सदा ही साथ रहते हैं। आनन्द- विज्ञान-मन-प्राण-वाक् (शरीर) से हमारे पंचकोश … more →
gulabkothari wrote 3 months ago: सकारात्मक होना या नकारात्मक होना केवल अभ्यास की बात है। जीवन में संस्कारों को तो आसानी से नहीं बदला … more →
gulabkothari wrote 3 months ago: गलतियों का पुतला है आदमी। भोलेपन में, प्रवाह में, आवेश में, नादानी में, हो सकती हैं गलतियां। क्या जर … more →
gulabkothari wrote 3 months ago: वेवेद शब्द विद् धातु से बना है। इसका अर्थ है ज्ञान अथवा लाभ। ज्ञान का स्वरूप निर्घारण करने से पहले ज … more →
gulabkothari wrote 3 months ago: जीवन में अच्छा या बुरा दृष्टि के आधार पर ही तय होता है। सृष्टि में सबका अर्थ समान है। सबकी बराबर उपय … more →
gulabkothari wrote 3 months ago: जिसकी जीवन भर सबको तलाश रहती है उसी को आनंद कहते हैं। सम्पूर्ण सुख-समृद्धि का सूचक शब्द है। और सृष्ट … more →