हर गोशा गुलिस्तां था कल रात जहां मै था एक जश्न-ए-बहारां था कल रात जहां मै था नग़्मे थे हवाओं में जादू था फ़िज़ाओं में हर साँस ग़ज़लफ़ां था कल रात जहां मै था दरिया-ए-मोहब्बत में कश्ती थी जवानी की जज़्बात का त… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामwrote 1 year ago: हर गोशा गुलिस्तां था कल रात जहां मै था एक जश्न-ए-बहारां था कल रात जहां मै था नग़्मे थे हवाओं में जादू … more →