नै१ बुलबुले-चमन न गुले-नौदमीदा२ हूँ मैं मौसमे-बहार में शाख़े-बरीदा३ हूँ गिरियाँ न शक्ले-शीशा व ख़ंदा न तर्ज़े-जाम४ इस मैकदे के बीच अबस५ आफ़रीदा६ हूँ तू आपसे७ ज़बाँज़दे-आलम८ है वरना मैं इक हर्फ़े-आरज़ू… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 3 months ago: नै१ बुलबुले-चमन न गुले-नौदमीदा२ हूँ मैं मौसमे-बहार में शाख़े-बरीदा३ हूँ गिरियाँ न शक्ले-शीशा व ख़ंदा … more →
विनय wrote 9 months ago: कैसे मिलूँ तुमसे जो न मिलना चाहो चला चलूँ अगर साथ चलना चाहो नहीं कहते हो मुझ से हर बार तुम करूँ क्या … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ुशबू बिछायी है राहों में तुम चले आओ, तुम चले आओ दिल बेक़रार है बहुत तुम चले आओ, तुम चले आओ मौसम बड़ … more →
विनय wrote 1 year ago: इश्क़ सुना है हमने बहुत ज़रा करके तो देखें मिल जाये कोई कमसिन हसीना उसपे मरके तो देखें हाए रे हाए, हाए … more →
विनय wrote 1 year ago: इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन दिल में है हर पल इक तड़पन सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन चाँद जो वह … more →
विनय wrote 1 year ago: एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम हर लम्ह … more →
विनय wrote 1 year ago: जानते हैं दर्द बुझते हुए चाँद का जब बढ़ते आते हैं सुबह के क़दम जुस्त-जू की छाया खो जाती है कहीं चाँद … more →
विनय wrote 1 year ago: तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे सिर्फ़ तू ही म … more →
विनय wrote 1 year ago: जब से भूल जाना चाहा तुमको तेरी याद और भी आती है सपना क्या कभी कोई ऐसा हुआ जो बिखरा नहीं बची राख को आ … more →
विनय wrote 1 year ago: ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं हाथों … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल के ख़ाब दिल में ही सुलगते हैं हक़ीक़त के निशाँ अभी दूर लगते हैं हल्की-हल्की आवाज़ें कानों में गुनगु … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरे दिल की पगडंडियों से रोज़ाना कितने गुज़रते हैं कितने क़दमों के निशाँ बनते हैं कितने मिटते हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: काश वह कोई गुल होती मैं उसे अपने लबों से चूम लेता गर वह कोई आइना होती मैं ख़ुद को उसमें उतार देता इश … more →
विनय wrote 2 years ago: जब तक तेरी तमन्ना करेंगे जीते जायेंगे वरगना दम तोड़ देंगे मर जायेंगे तुमने जो कहा तो मर भी जाना है ह … more →
विनय wrote 2 years ago: यादों का सागर गहरा है उसमें डूब जाऊँ तो वक़्त का हर लम्हा ठहरा है कोई काँटा-सा है जो लग गया है इक फाँ … more →
विनय wrote 2 years ago: एक मुलाक़ात की इल्तजा है उससे दुआ है वह क्यों नहीं मिलता मुझसे उसे क्या शुबा है मुझ मुरीद को न क़रार ह … more →