कोई तुमसे मुलाक़ात का बहाना ढूँढ़ता है फिर से वही गुज़रा हुआ ज़माना ढूँढ़ता है वह एक पल जो थम के रह गया है कहीं उस पल में बीता हुआ अफ़साना ढूँढ़ता है जिसमें शराब गुलाबी मिला करती थी वहाँ आज अपने माज़ी का व… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: कोई तुमसे मुलाक़ात का बहाना ढूँढ़ता है फिर से वही गुज़रा हुआ ज़माना ढूँढ़ता है वह एक पल जो थम के रह गया … more →