प्रथम गोचारण चले कन्हाई। माथे मुकुट पीतांबर की छबी वनमाला पहराइ ॥१॥ कुंडल श्रवण कपोल बिराजत, सुंदरता बनि आइ । घर घरतें सब छाक लेत हे संग सखा सुखदाइ ॥२॥ आगें धेनु हांक लीनी पाछे मुरली बजाइ। परमानंद प्र… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 2 years ago: प्रथम गोचारण चले कन्हाई। माथे मुकुट पीतांबर की छबी वनमाला पहराइ ॥१॥ कुंडल श्रवण कपोल बिराजत, सुंदरता … more →