Alok Kumar wrote 1 year ago: हो जाऊँ कभी मैं तेज (बिजली) सा सूरज की तेज किरण सा घुमु मैं कहीं भी हो घर मेरा मधुवन सा राज करू जहां … more →
Alok Kumar wrote 1 year ago: हम आजाद होते तो यह देश इक नगमा होता संगीत झरने पशु पक्षी देते गायक भारत जन होता बारिश होती न कहीं बा … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: हमने मोदी को वोट क्यों दिया : त्रिदिप सुहृद का यह लेख आज ‘हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित हुआ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: थका हारा आदमी काम से जब घर वापस लौटा तो सास-बहू में कोहराम मचा हुआ था बाप बाहर सिर पकड़े बैठा था तो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आँखें देखतीं हैं कान सुनते हैं और जीभ का काम है बोलना पर जो पहचान करे सुनकर जो गुने और जो श्रीमुख से … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह कविता काल्पनिक है तथा किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है ) नंबर एक पर हौं या … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है) अपने आईने में हमारा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मुझे कोई गुरू नहीं मिला, इसीलिये आध्यात्म विषयों पर बडे संकोच के साथ लिखता और विचार व्यक्त करता हूँ। … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: लिखने से इन्कलाब या बदलाव नहीं आता पर बिना लिखे भी कौनसा आ जाता है। इन्कलाब लान … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अब कुछ लोगों ने देश में ताजमहल को विश्व के अजूबों में शामिल कराने के लिए एक अ … more →