मेरे बचपन की ख़ुशबू मेरे साथ ही चलती है कभी मेरे ख़ाब में कभी किताब में मिलती है कभी पतंगों के साथ आसमाँ में उड़ती है कभी मालती की बेलों में महकती खिलती है रुचि सोनल जूली नीता बिन्नू संजू पवन प्रीति स… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 years ago: मेरे बचपन की ख़ुशबू मेरे साथ ही चलती है कभी मेरे ख़ाब में कभी किताब में मिलती है कभी पतंगों के साथ आ … more →