मैनहन की तमाम सुबहों में मैने वो गीत सुने जिन्हे चुनुवा फ़कीर गाया करते थे। अब वे लोग जैसे विलुप्त हो गये या यूं कहे कि विकास की बलि-वेदीं पर चढ़ा दिए गये। भोर हो नही पाता था पांच या सात की तादाद में ये… more →
मैनहनKrishna Kumar Mishra wrote 1 week ago: मैनहन की तमाम सुबहों में मैने वो गीत सुने जिन्हे चुनुवा फ़कीर गाया करते थे। अब वे लोग जैसे विलुप्त हो … more →
Krishna Kumar Mishra wrote 1 month ago: कोयल बोले या गौरैया अच्छा लगता है अपने गाँव में सब कुछ भैय्या अच्छा लगता है View Larger Map … more →
Krishna Kumar Mishra wrote 3 months ago: हे ग्राम देवता ! नमस्कार ! Mahadeo सोने-चाँदी से नहीं किंतु तुमने मिट्टी से दिया प्यार । हे ग्राम दे … more →
राजीव् तनेजा wrote 1 year ago: “महिमा मंडन-एक ग्राम सेवक का” ***राजीव तनेजा*** भारत किसानों का..खे … more →