धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं अपने घर के… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामHarihar Jha हरिहर झा wrote 1 week ago: गम भुलाकर दिमाग खुश होना चाहता है ये दुखी दिल जी भर के अब रोना चाहता है ढो लिये चाँद-तारे आकाश उकता … more →
Amarjeet Singh wrote 9 months ago: धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ … more →
Amarjeet Singh wrote 9 months ago: आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा इतना मानूस न हो ख़िलवतेग़म से … more →
Rohit Jain wrote 12 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →
Rohit Jain wrote 12 months ago: हार जाने की कामरानी पर दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ता … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आप भी अजीब हैं क्यूँ मेरे करीब हैं देते हैं दवा में ज़हर ये मेरे तबीब हैं तबीब == He … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कुछ गिरा है, मै यहां पर क्या गिरा है देख लूँ है लहू किसका ये उसका या मिरा है देख लूँ मै नहीं जाता था … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल जो टूटा तो बताओ के किधर जाओगे तुम भी इस राह में आखिर को बिखर जाओगे हद से हद ये ही मिलेगा मुझे चा … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: यादें बिन आये भी जब सीने में जलने लगती हैं तस्वीरें रंग बदलती हैं तन्हाई में बोलने लगती हैं तारीकी ऐ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कौन ये कश्ती ले उतरा तूफ़ान में इतना दम कब से आया इन्सान में वो देखता रह्ता है आसमां की तरफ़ कोई रहता … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मिजाज़ेज़िंदगी है काफ़िराना कभी बातों में इसकी तुम न आना कभी होता था मै भी आशिक़ाना हुआ क्या के हुआ सब म … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सेहर है या कोई सहरा है लोगों सभी बातों पे क्यों पहरा है लोगों जहां कश्ती मेरी आकर रुकी है समन्दर और … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कोई भी इस जहां में ना कहीं बरबाद रहे जो जहां पर भी रहे खुश रहे आबाद रहे ना रहें मंदिरें ना मस्जिदें … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: बहुत दिनों से ग़ैरहाज़िर हूँ जिसके लिये माफ़ीगुज़ार हूँ. अपनी हालत बयां करने के लिये एक फ़ैज़ साहब का शेर … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: एक ग़र चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे क्या इनसे किसी कौम की तक़दीर बदल दोगे जायस से वो हिन्दी की दरिया … more →