Blogs about: गज़ल

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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो2 comments

Amarjeet Singh wrote 4 months ago: धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ … more →

Tags: Álbums, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh, Non Films, Sajda, घटाओं में नहा, जगजीत सिंह, धूप में निकलो

आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा

Amarjeet Singh wrote 4 months ago: आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा इतना मानूस न हो ख़िलवतेग़म से … more →

Tags: Álbums, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh, Non Films, Sajda, Ahmed Faraz, आँख से दूर न हो दिल से, जगजीत सिंह

आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल4 comments

Rohit Jain wrote 6 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही शे … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, DEC 2008, में, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain

मोहब्बत में1 comment

Rohit Jain wrote 7 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain

दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर5 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: हार जाने की कामरानी पर                दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008

शायद4 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008

सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो2 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, हो, रोहित, जैन, कविता, Rohit

मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ7 comments

Rohit Jain wrote 8 months ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, की, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain

सिलसिला गुनाह का1 comment

Rohit Jain wrote 8 months ago: ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ता … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008

आप भी अजीब हैं3 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: आप भी अजीब हैं क्यूँ मेरे करीब हैं देते हैं दवा में ज़हर ये मेरे तबीब हैं                  तबीब == He … more →

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देख लूँ3 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: कुछ गिरा है, मै यहां पर क्या गिरा है देख लूँ है लहू किसका ये उसका या मिरा है देख लूँ मै नहीं जाता था … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008

तुम भी5 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: दिल जो टूटा तो बताओ के किधर जाओगे तुम भी इस राह में आखिर को बिखर जाओगे हद से हद ये ही मिलेगा मुझे चा … more →

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यादें बिन आये भी जब6 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: यादें बिन आये भी जब सीने में जलने लगती हैं तस्वीरें रंग बदलती हैं तन्हाई में बोलने लगती हैं तारीकी ऐ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008

क्या क्या6 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: कौन ये कश्ती ले उतरा तूफ़ान में इतना दम कब से आया इन्सान में वो देखता रह्ता है आसमां की तरफ़ कोई रहता … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008

मिजाज़ेज़िंदगी है काफ़िराना3 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: मिजाज़ेज़िंदगी है काफ़िराना कभी बातों में इसकी तुम न आना कभी होता था मै भी आशिक़ाना हुआ क्या के हुआ सब म … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Aug 2008, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008

चेहरों पे चेहरा8 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: सेहर है या कोई सहरा है लोगों सभी बातों पे क्यों पहरा है लोगों जहां कश्ती मेरी आकर रुकी है समन्दर और … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Aug 2008, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008

नज़्म - दुआ3 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: कोई भी इस जहां में ना कहीं बरबाद रहे जो जहां पर भी रहे खुश रहे आबाद रहे ना रहें मंदिरें ना मस्जिदें … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008

और भी काम हैं ज़माने में3 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: बहुत दिनों से ग़ैरहाज़िर हूँ जिसके लिये माफ़ीगुज़ार हूँ. अपनी हालत बयां करने के लिये एक फ़ैज़ साहब का शेर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, में, रोहित, जैन, कविता, Rohit, jain

अदम गोंडवी : दो गज़लें3 comments

अफ़लातून wrote 11 months ago: एक ग़र चंद तवारीखी तहरीर बदल दोगे क्या इनसे किसी कौम की तक़दीर बदल दोगे   जायस से वो हिन्दी की दरिया … more →

Tags: adam gondvi, Ghazal, अदम गोंडवी


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