धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं अपने घर के… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 9 months ago: धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ … more →